अनशन तोड़ने के बाद वांगचुक का नया वीडियो, इन 3 मांगों पर बनी सहमति, स्वाद पर भी बोले

उन्होंने कहा कि मुझे लिखित में आश्वासन मिला है. देखना होगा कि आगे क्या होता है. विस्तार से पढ़ें.![]()
नई दिल्ली: सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुवार देर रात करीब 26 दिनों बाद अपनी भूख हड़ताल समाप्त कर दी है. उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अनशन खत्म करने का फैसला लिया है.
वहीं, सरकार ने मानसून सत्र 2026 के दौरान परीक्षा सुधार पर बहस, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर केस दर्ज नहीं करने और नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak 2026) से जुड़े आत्महत्या पीड़ितों को मुआवजा देने पर भी विचार करने की बात कही है. बता दें, सोनम वांगचुक ने शुक्रवार को मेदांता हॉस्पिटल में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजूदगी में अपनी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म कर दी.
जानकारी के मुताबिक दोनों केंद्रीय मंत्री करीब 11 बजकर 30 मिनट पर उनसे मिलने पहुंचे. इनके साथ लद्दाख की सुप्रीम बॉडी के बड़े नेता भी मौजूद रहे. सोनम वांगचुक ने इस सिलसिले में सोशल मीडिया ‘एक्स’ पर एक वीडियो भी शेयर किया है, जिसमे उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह जरूरी गारंटी देने के लिए उनसे मिलने आए थे. वांगचुक ने वीडियो जारी करते हुए कहा कि नमस्ते दोस्तों. आज, 26वें दिन, मैं आप सभी के साथ कुछ खास खबर शेयर करना चाहता हूं. अभी रात के करीब 12:30 बज रहे हैं. थोड़ी देर पहले, केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह मुझसे यहां मिलने आए थे. एपेक्स बॉडी के टॉप लीडर भी मौजूद थे.
हाल ही में राष्ट्रीय लेवल की परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों का विरोध कर रहे एक्टिविस्ट ने कहा कि यह सफलता संसद के काफी सपोर्ट और गहरी बातचीत के बाद मिली है. उन्होंने कहा कि जैसा कि आप जानते हैं, इससे पहले, अलग-अलग पॉलिटिकल पार्टियों के करीब 65 सांसद यहां आए थे, उन्होंने अपने साइन किए थे, और हमसे भूख हड़ताल खत्म करने की रिक्वेस्ट की थी. उन्होंने हमें भरोसा दिलाया कि वे नीट (NEET) पेपर्स और एग्जामिनेशन सिस्टम के मुद्दे पर पार्लियामेंट में बात करेंगे. वांगचुक ने आगे बताया कि पहले ज़ुबानी भरोसा दिया गया था, लेकिन उन्होंने एक फॉर्मल डॉक्यूमेंट पर जोर दिया, जिससे उनका अनशन खत्म करने में दो दिन की देरी हुई.
एक्टिविस्ट ने आगे कहा कि सरकार की तरफ से आए मंत्रियों ने भी यह भरोसा दिया. पिछले दो दिनों से, एक बहुत मुश्किल–मैं कैसे कहूं–एक तरह की ‘सौदेबाजी’ चल रही थी क्योंकि मुझे ये भरोसे लिखित में चाहिए थे. इसके लिए दो दिन ज़्यादा लग गए, और अगर जरूरत होती तो मैं और देर तक बैठता, लेकिन आखिरकार, आज, उन्होंने लिखकर भरोसा दे दिया है.
वांगचुक ने केंद्रीय मंत्रियों जे.पी. नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मीटिंग के बाद सरकार के खास वादों के बारे में बताया. उन्होंने कहा कि सरकार मृतक स्टूडेंट्स के परिवारों को आर्थिक राहत देने के लिए सहमत हो गई है. वांगचुक ने आगे इस बात पर जोर दिया कि सरकार ने भविष्य में होने वाली गलतियों को रोकने के लिए एग्जामिनेशन सिस्टम का फॉर्मल लेजिस्लेटिव रिव्यू करने का वादा किया है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर बात करते हुए वांगचुक ने माना कि सरकार ने कोई साफ टाइमलाइन नहीं दी थी, लेकिन उन्होंने लंबे समय के संघर्ष और स्टूडेंट्स की सुरक्षा को प्राथमिकता दी.
उन्होंने कहा कि आज उन्होंने लिखकर भरोसा दिया है. पहला, हमारे स्टूडेंट्स और युवा जो जंतर-मंतर पर शांति से प्रोटेस्ट कर रहे हैं या जिन्होंने 20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च में हिस्सा लिया था, उनके खिलाफ कोई लीगल एक्शन, FIR वगैरह नहीं किया जाएगा. दूसरा, इस पेपर लीक हादसे में जो बच्चे मारे गए, जिनकी संख्या 20 से ज्यादा है, उन्हें सही मुआवजा दिया जाएगा; उनके परिवारों को मुआवजा दिया जाएगा. तीसरा, इस मुद्दे पर पार्लियामेंट में पूरी चर्चा और बहस होगी और एजुकेशन और एग्जाम में सरकार की अकाउंटेबिलिटी लाने पर भी बात होगी, ताकि यह पक्का हो सके कि ऐसा दोबारा न हो और जो हुआ है उसकी पूरी अकाउंटेबिलिटी हो. अब आप जरूर पूछेंगे कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का क्या हुआ. सबसे पहले, वे मुझे कोई भरोसा नहीं दे पाए कि यह कब होगा.
वहीं, सोनम वांगचुक ने लद्दाख की एपेक्स बॉडी के नेताओं का भी धन्यवाद किया, जो यहां आए. उन्होंने आभार जताते हुए कहा कि 26 दिनों के बाद कुछ खाने को मिला है. यह स्वाद बेहद अच्छा लग रहा है, लेकिन बताना चाहूंगा कि भूख का कोई स्वाद नहीं होता है.

