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विश्व पर्यावरण दिवस: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से प्लास्टिक बोतलों की होगी विदाई, सैलानियों को कांच की बोतलों में दिया जाएगा पानी

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन द्वारा खास पहल की गई है. अब पर्यटकों को प्लास्टिक की जगह कांच की बोतलों में पेयजल दिया जाएगा.

रामनगर: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल की घोषणा की है. कॉर्बेट प्रशासन ने अगले पर्यटन सीजन से पार्क के भीतर प्लास्टिक की पानी की बोतलों के उपयोग को पूरी तरह बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है. इसके स्थान पर पर्यटकों को कांच की बोतलों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने में मदद मिलेगी और जंगल का प्राकृतिक वातावरण अधिक सुरक्षित रह सकेगा.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. साकेत बडोला ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर इस नई योजना की जानकारी देते हुए बताया कि कॉर्बेट प्रशासन लंबे समय से पार्क क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है. उन्होंने कहा कि वर्तमान में कॉर्बेट के अधिकांश पर्यटन जोन प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र के रूप में विकसित हो चुके हैं और इस दिशा में विभाग को काफी हद तक सफलता भी मिली है. साकेत बडोला ने बताया कि पर्यटन के दौरान पर्यटकों को स्वच्छ पेयजल की आवश्यकता होती है, जिसके लिए वे आमतौर पर प्लास्टिक की पानी की बोतलों का उपयोग करते हैं. हालांकि इन बोतलों को पार्क से बाहर लाने और उनका उचित निस्तारण करने की व्यवस्था मौजूद है.

लेकिन फिर भी प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाया है. इसी समस्या को देखते हुए कॉर्बेट प्रशासन ने प्लास्टिक की पानी की बोतलों को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया है. योजना के तहत कॉर्बेट में एक बॉटलिंग प्लांट स्थापित करने की तैयारी की जा रही है. इस प्लांट में शुद्ध और सुरक्षित पेयजल को कांच की बोतलों में भरकर पर्यटकों को प्रवेश द्वारों पर उपलब्ध कराया जाएगा. पर्यटक इन बोतलों को अपने साथ जंगल सफारी के दौरान ले जा सकेंगे और वापसी पर इन्हें निर्धारित केंद्रों पर जमा कर सकेंगे, कॉर्बेट प्रशासन ने इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जमा-राशि आधारित प्रणाली लागू करने की भी योजना बनाई है.

इसके तहत पर्यटकों से पानी और कांच की बोतल का शुल्क प्रवेश द्वार पर लिया जाएगा, सफारी पूरी होने के बाद यदि पर्यटक बोतल को सुरक्षित अवस्था में वापस जमा कर देते हैं, तो बोतल की निर्धारित राशि उन्हें लौटा दी जाएगी. इस व्यवस्था से न केवल कांच की बोतलों का पुनः उपयोग संभव होगा, बल्कि पर्यटक भी बोतलों को सुरक्षित रखने के लिए प्रोत्साहित होंगे. वन अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से कॉर्बेट के जंगलों में प्लास्टिक कचरे की संभावना लगभग समाप्त हो जाएगी,साथ ही वन्यजीवों और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को भी बेहतर सुरक्षा मिलेगी.

प्लास्टिक प्रदूषण वन्यजीवों और पर्यावरण के लिए एक गंभीर चुनौती माना जाता है, ऐसे में कॉर्बेट प्रशासन का यह कदम अन्य संरक्षित वन क्षेत्रों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है. विश्व पर्यावरण दिवस पर घोषित इस पहल को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.

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