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ज्योलीकोट में 3 लोगों की जान लेने वाले पानी के सभी 9 सैंपल फेल, 24 नमूनों की जांच कर रही थर्ड पार्टी

ज्योलीकोट ब्लॉक में महामारी फैली हुई है, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा ज्योलीकोट के 9 स्थानों से लिए गए सैंपल फेल, रिपोर्ट- राकेश रावत

हल्द्वानी: नैनीताल के ज्योलीकोट महामारी में नया खुलासा हुआ है. ज्योलीकोट के आसपास के इलाकों में दूषित पानी की सप्लाई का मामला कम होने का नाम नहीं ले रहा है. PCB यानी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की शुरुआती सैंपलिंग की रिपोर्ट में जो तथ्य सामने आए हैं, वह बेहद चौंकाने वाले हैं. 8 सितंबर 2026 को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ज्योलीकोट इलाके में 9 जगहों से पानी के सैंपल लिए थे. इन सैंपल की रिपोर्ट आने के बाद पता चला कि 9 के 9 पानी के सैंपल में बैक्टीरिया पाया गया है. यानी कोई भी पानी पीने योग्य नहीं था.

ज्योलीकोट के पानी से सभी सैंपल फेट: ज्योलीकोट दूषित पेयजल मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद PCB लगातार पानी की सैंपलिंग कर रहा है. नैनीताल के ज्योलीकोट और आसपास के गांवों में दूषित पेयजल और सैकड़ों लोगों के बीमार होने और दो मौतों के मामले में 8 सितंबर को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नौ जगहों से पानी के सैंपल लिए और पता चला कि सभी 9 सैंपल में बैक्टीरिया पाया गया है, जो मानव जीवन के लिए घातक है.

PCB की शुरुआती रिपोर्ट में बड़ा खुलासा:

  • PCB ने 9 स्थानों से लिए पानी के सैंपल की रिपोर्ट हाईकोर्ट में रखी
  • सभी रिपोर्ट में पानी की गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरी
  • कुछ सैंपलों में मानव मल-मूत्र, तो कुछ में जानवरों के मल-मूत्र के मिश्रण की पुष्टि बताई गई
  • जल संस्थान की शुरुआती रिपोर्ट और PCB की जांच के नतीजों में अंतर सामने आया

10 सितंबर को 17 सैंपल लिए गए: नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद PCB ने 10 सितंबर को प्रभावित इलाकों से नगर पालिका परिषद और जल संस्थान के अधिकारियों की मौजूदगी में 17 सैंपल और लिए हैं.

अभी 24 सैंपल की टेस्टिंग कर रही थर्ड पार्टी: पीसीबी के आरएम ने बताया कि-

11 सितंबर को प्रदूषण नियंत्रण कंट्रोल बोर्ड ने ग्राम प्रधानों की मौजूदगी में प्रभावती इलाकों से 7 सैंपल इकट्ठा किए हैं. इन सभी 24 सैंपल की टेस्टिंग थर्ड पार्टी के द्वारा कराई जा रही है जिसकी रिपोर्ट का इंतजार है.
-अनुराग नेगी, RM, PCB-

दोषित पेयजल सप्लाई करने वालों पर कब होगा एक्शन: फिलहाल PCB की जांच में पानी की पहली 9 रिपोर्ट फेल पाई गई हैं. प्रभावित इलाकों में ग्रामीणों को टैंकरों से पानी की सप्लाई की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से निगरानी और उपचार की व्यवस्था जारी है. जरूरत पड़ने पर बाहर से विशेषज्ञ डॉक्टर बुलाने के निर्देश भी दिए गए हैं. लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है कि गांव में दूषित पेयजल की सप्लाई का जिम्मेदार कौन है? उन लापरवाह अधिकारियों पर कब कार्रवाई होगी.

जो 9 सैंपल फेल हुए यहां से लिया गया था पानी: 8 सितंबर को ज्योलीकोट, बेलुवाखान, सरियाताल और चोपड़ा गांवों के ग्राम प्रधानों की उपस्थिति में संयुक्त नमूनाकरण किया गया. जिन स्थानों से पानी के नमूने लिए गए उनका विवरण इस प्रकार है-

इन 9 स्थानों से लिए गए थे पानी के सैंपल

  1. मनोरा जल टंकी, ग्राम-मनोरा, बेलुवाखान
  2. लोअर मनोरा वाटर टैंक, ग्राम मनोरा, बेलुवाखान
  3. मल्ला बेलुवाखान निकट सनराइज रिजॉर्ट नैनीताल-हल्द्वानी रोड, नैनीताल
  4. नल जल चीना गांव, वीरभट्टी, नैनीताल
  5. पार्वती प्रेमा जगाती सरस्वती स्कूल वीरभट्टी, नैनीताल के पास जल स्रोत
  6. देबुवाजाला जल टैंक, ग्राम-गेठिया, वीरभट्टी पुल के पास
  7. रामलीला मैदान मिशन रोड ज्योलीकोट के पास नल का जल
  8. बसगांव-चोपड़ा पानी की टंकी, गांव-चोपड़ा, नैनीताल
  9. सरियाताल पानी की टंकी, ग्राम-सरियाताल, नैनीताल

ज्योलीकोट में क्या हुआ है? नैनीताल जिले के ज्योलीकोट ब्लॉक के अनेक गांवों में दूषित पानी के कारण महामारी फैली है. लोग उल्टी-दस्त, डायरिया, पीलिया, टायफाइड से पीड़ित हैं. इस महामारी से 3 लोगों की जान जा चुकी है और 250 से ज्यादा लोग बीमार हैं.

कैसे फैली महामारी? बताया जा रहा है कि दुर्गापुर पेयजल संयंत्र के ऊपर बने सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का गंदा और बदबूदार पानी रिसकर साफ पानी की मुख्य पाइपलाइन में मिल रहा था. 8 सितंबर को जल संस्थान के अफसरों ने हाईकोर्ट में स्वीकार किया कि पुराने कूड़ा खड्ड के पास जल स्रोत में सीवर का पानी मिक्स होने की वजह से बीमारी की स्थिति पैदा हुई. इस पर कोर्ट ने कड़े लहजे में अधिकारियों से कहा कि बीमारी आपकी लापरवाही से फैली है. इसलिए इसके इलाज और पूरी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी आपकी ही होगी.

ग्रामीणों ने पहले ही बदबूदार पानी की शिकायत की थी: ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने महीनों पहले बदबूदार पानी आने की शिकायत की थी. लेकिन जल संस्थान के अधिकारियों ने समय रहते कोई कदम नहीं उठाया. धीरे-धीरे उल्टी-दस्त, पीलिया और टायफाइड ने महामारी का रूप ले लिया. हाईकोर्ट ने पहली ही सुनवाई में इसे महामारी जैसा बताया था.

2 मौतों और 250 लोगों के बीमार होने का हाईकोर्ट में मामला जाने पर जागे विभाग: शुरुआत लेकर लेकर ज्योलीकोट में महामारी फैलने तक जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग मूकदर्शक बने रहे. जब दो लोगों की मौत हो गई और 250 लोग गंभीर बीमार हो गए. नैनीताल से दिल्ली तक मरीज भर्ती होने लगे तो तब जाकर जिम्मेदार विभागों की नींद टूटी. फिर जल संस्थान ने वाटर टैंकर भेजने शुरू किए. स्वास्थ्य विभाग ने कैंप लगाने शुरू किए. जल संस्थान और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को नैनीताल हाईकोर्ट से कड़ी फटकार भी लगी. बाद में एक और व्यक्ति की मौत की पुष्टि होने पर मृतकों की संख्या 3 पहुंच गई.

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