नर्सिंग अभ्यर्थी प्रदर्शन: डीजी हेल्थ ने भेजे ये 3 प्रस्ताव, ज्योति बोलीं मंत्री ने अगर की वादाखिलाफी तो फिर लड़ेंगे

ज्योति रौतेला बोलीं हमने नर्सिंग एकता मंच के आंदोलन की पहली सीढ़ी चढ़ी है, स्वास्थ्य मंत्री ने मांग पूरी होने का दिया है आश्वासन
देहरादून: राजधानी में पिछले 161 दिन से नर्सिंग एकता मंच के बैनर तले चल रहा नर्सिंग अभ्यर्थियों का धरना आखिर एक महीने के लिए स्थगित हो गया है. बीते 60 घंटे से परेड ग्राउंड में पानी की टंकी पर चढ़ी कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला और नर्सिंग अभ्यर्थी आखिरकार नीचे उतर गए. लंबी जद्दोजहद के बाद सरकार ने निर्णय लिया और मध्यस्थता की भूमिका निभाते हुए सिटी मजिस्ट्रेट प्रत्यूष सिंह और एसपी सिटी प्रमोद कुमार को परेड ग्राउंड भेजा. डीजी हेल्थ ने सरकार को कुछ प्रस्ताव भेजे हैं.
टंकी पर 60 घंटे के प्रदर्शन का अंत: फिलहाल पुलिस टंकी पर चढ़े पांचों लोगों को कोरोनेशन अस्पताल मेडिकल परीक्षण के लिए ले गई है. इस दौरान उन्होंने टंकी पर रहकर लिक्विड डाइट का ही सेवन किया. ऐसे में ठोस भोजन का त्याग करने की वजह से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं. इसके अलावा अपने ऊपर पेट्रोल छिड़कने से ज्योति रौतेला की त्वचा पर भी प्रभाव पड़ा है.
डीजी हेल्थ ने सरकार को भेजे ये प्रस्ताव: वहीं अभ्यर्थियों की मांगों के संबंध डीजी हेल्थ द्वारा सरकार को भेजे गए प्रस्ताव में यह निर्णय लिया गया है कि नर्सिंग अधिकारियों की वर्तमान भर्ती प्रक्रिया को अंतिम बार वर्ष भर के आधार पर पूर्ण किया जाए, ताकि वर्षों से प्रतीक्षा कर रहे हैं शेष अभ्यर्थियों को न्याय मिल सके. भविष्य की भर्तियों में न्यूनतम 2 वर्ष का क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य किया जाए, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आए. तीसरा बिंदु यह है कि चयन प्रक्रिया में यह प्रावधान जोड़ा जाए कि सेवा के दौरान मरीज के जीवन के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही पाये जाने पर संबंधित कर्मी के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए. आंदोलनरत कर्मी भी सरकार के इस निर्णय से संतुष्ट हुए.
डीजी हेल्थ द्वारा भेजे गए प्रस्ताव
- नर्सिंग अधिकारियों की वर्तमान भर्ती प्रक्रिया अंतिम बार साल भर के लिए पूर्ण की जाएगी
- भविष्य में नर्सिंग अधिकारियों की भर्ती प्रक्रिया में 2 वर्ष का न्यूनतम क्लीनिकल अनुभव अनिवार्य होगा
- चयन प्रक्रिया में ये प्रावधान होगा कि सेवा के दौरान मरीज के इलाज में कोई भी लापरवाही मिलने पर,संबंधित कर्मचारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी
नर्सिंग एकता मंच के अध्यक्ष ने कही ये बात: नर्सिंग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर का कहना है कि-
हमारा धरना अभी 1 महीने के लिए स्थगित हुआ है. सरकार ने इस पर सकारात्मक पहल दिखाई है. हम सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल का धन्यवाद अदा करते हैं.
-नवल पुंडीर, अध्यक्ष, नर्सिंग एकता मंच-
नवल का कहना है कि सरकार ने अपनी तरफ से एक कदम आगे बढ़ाया है. इसलिए उन्होंने एक महीने के लिए धरना स्थगित किए जाने का निर्णय लिया है, ताकि भर्तियों को सुचारू रूप से सम्पन्न कराया जा सके और जिसका लाभ आम जनमानस को मिल सके.
गणेश गोदियाल बोले जो बातें संभव हैं उन्हें माने सरकार: इस मामले पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का कहना है कि-
विगत कई दिनों से धरने पर बैठे इन अभ्यर्थियों के आंदोलन में हम 15 दिन पहले वह भी गए थे. हमने उसी दिन कहा था कि जो बातें संभव हो सकती हैं, उसको मानने में सरकार को कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. यह भी अपने राज्य के बच्चे हैं. लेकिन अड़ियल और तानाशाही रवैये के चलते सरकार कुछ भी मानने को तैयार नहीं थी. उसके बाद ज्योति रौतेला ने जान की बाजी लगाकर टंकी पर चढ़ने का निर्णय लिया, जिसके बाद सरकार चित हो गई.
-गणेश गोदियाल, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष-
गोदियाल ने बताया आंदोलनकारियों की जीत: गणेश गोदियाल ने आंदोलनकारियों को बधाई देते हुए कहा कि इन्होंने सरकार के ऊपर जीत हासिल की है. सरकार अब इसमें मीन मेख न निकाले तो बेहतर होगा.डीजी हेल्थ ने जो प्रस्ताव सरकार को भेजा है, अब सरकार यह मानते हुए कि अतीत में रहे उनके स्वास्थ्य मंत्री ने अपने हितों को साधने के लिए इन अभ्यर्थियों के साथ खिलवाड़ किया है, सरकार को अब इस गलती को स्वीकार करना होगा.
ज्योति रौतेला बोलीं मंत्री वादे से हटेंगे तो फिर होगी लड़ाई: इधर टंकी से उतरने के बाद भावुक हुईं ज्योति रौतेला ने कहा कि-
हमने नर्सिंग एकता मंच के आंदोलन की पहली सीढ़ी को चढ़ा है, हमारी इस दौरान व्यक्तिगत रूप से स्वास्थ्य मंत्री के साथ दो बार बातचीत हुई है. उन्होंने आश्वस्त किया है कि जो प्रस्ताव दिया गया है, उसे पूरा किया जाएगा. उन्होंने अभ्यर्थियों के हितों को लेकर हर संभव मदद का भरोसा दिया है.
-ज्योति रौतेला, महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष-
ज्योति रौतेला ने चेताया कि यदि स्वास्थ्य मंत्री अपने वादे से पीछे हटेंगे, तो इस लड़ाई को दोबारा लड़ा जाएगा.
स्वास्थ्य मंत्री ने ये कहा था: इससे पहले बुधवार को नर्सिंग बेरोजगारों की मांग पर स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि,
“नर्सिंग बेरोजगारों की ओर से मिले ज्ञापन का परीक्षण कराया जा रहा है. इसके साथ ही बेरोजगारों ने हिमाचल का शासनादेश भी दिया है, उस शासनादेश का भी परीक्षण करने की बात हुई है. बैठक में इसका परीक्षण किया जाएगा. कैबिनेट बैठक में नर्सिंग बेरोजगारों का कोई एजेंडा नहीं है.“-सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड-
नर्सिंग अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन क्यों किया था? उत्तराखंड में करीब 4,000 नर्सिंग के पद खाली पड़े हैं. उत्तराखंड सरकार ने साल 2020 में 3,000 नर्सिंग पदों पर भर्ती करने की घोषणा की थी. बड़ी संख्या में युवक-युवतियों ने इस भर्ती की तैयारी की, लेकिन परीक्षा नहीं कराई गई. नर्सिंग भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरी की आयु सीमा पार करने लगी. इससे वो नाराज हुए और उन्होंने पिछले 161 दिन से धरना-प्रदर्शन और 26 दिन से आमरण अनशन शुरू किया था.
नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांग क्या है? नर्सिंग अभ्यर्थियों की मांग है कि उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में वर्षवार भर्ती प्रक्रिया का लिखित आदेश जारी किया जाए. सीधी भर्ती में परीक्षा के बजाय नर्सिंग उत्तीर्ण करने के वर्ष (बैच) के आधार पर नियुक्ति दी जाए. सिर्फ आश्वासन नहीं बल्कि आधिकारिक कार्रवाई हो.

